नई दिल्ली: Hydrogen Train In India: बिजली-डीजल पर चलने वाली परंपरागत ट्रेनों को पीछे छोड़ते हुए भारत हाईटेक और सुपरफास्ट ट्रेनों का नेटवर्क तैयार करने में जुटा है. बुलेट ट्रेन, हाइपरलूप, मोनो रेल के साथ इसमें नया नाम हाइड्रोजन ट्रेन का जुड़ा है. प्रदूषण रहित इन ट्रेनों को भविष्य की ट्रेनें कहा जा रहा है. भारत ऐसी ट्रेनों वाला पांचवां देश बनने की दौड़ में है. चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में पहले हाइड्रोजन चालित कोच (Hydrogen Powered Train in India) का सफल ट्रायल शुक्रवार को हुआ.भारत 1200 हॉर्सपावर वाली हाइड्रोजन ट्रेन तैयार कर रहा है. आइए जानते हैं हाइड्रोजन चालित ट्रेनों के बारे में सब कुछ…

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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन
सोनीपत-जींद ट्रैक पर भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन दौड़ेगी. इसकी रफ्तार 110 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी. रेलवे ने 35 फ्यूल सेल वाली हाइड्रोजन चालित ट्रेनों का पहला बैच तैयार करने के लिए हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज (Hydrogen For Heritage) योजना शुरू की है. इसके लिए 28 सौ करोड़ रुपये का बजट रखा गया है.इसका इंजन विश्व में 500-600 हॉर्सपावर की जगह दोगुना यानी 1200 हॉर्सपावर की ताकत पैदा करेगा. अनुमान है कि 75-80 करोड़ से ऐसी एक हाइड्रोजन ट्रेन तैयार होगी.

हरियाणा में हाइड्रोजन प्लांट
भारतीय रेलवे ने हरियाणा के जींद जिले में हाइड्रोजन फ्यूल उत्पादन का प्लांट गाया है. यहां 3 हजार किलो हाइड्रोजन फ्यूल का स्टोरेज प्लांट भी होगा. इससे हाइड्रोजन ट्रेनों में आसानी से रिफ्यूलिंग की जा सकेगी.ये ट्रेन एक बार में 2600-2700 यात्रियों को ले जा सकती है. 2030 तक जींद-सोनीपत रेलवे रूट देश का पहला हाइड्रोजन चालित रेलवे ट्रैक होगा.

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H2 ट्रेन का मतलब
हाइड्रोजन ट्रेन का मतलब ऐसी ट्रेन जिसमें हाइड्रोजन का ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया गया हो. इसमें हाइड्रोजन को डीजल की तरह इंजन में इस्तेमाल करके या फिर हाइड्रोजन फ्यूल सेल (बैटरी) में ऑक्सीजन से रिएक्शन के जरिये ईंधन में बदला जा सकता है. इसे हाइड्रेल (hydrail) भी कहते हैं.

हाइब्रिड ट्रेन
हाइड्रोजन ट्रेनों को हाइब्रिड मॉडल में भी इस्तेमाल करने का विकल्प है, यानी जरूरत पड़ने पर हाइड्रोजन का ईंधन के तौर पर इस्तेमाल और साथ में बिजली या किसी अन्य ईंधन का. वैज्ञानिकों का कहना है कि हाइड्रोजन ईंधन का यात्री ट्रेन, मालगाड़ी, लाइट या रैपिड रेल, मेट्रो, ट्राम में इस्तेमाल हो सकता है. दुनिया में चीन, स्वीडन, जर्मनी और फ्रांस में हाइड्रोजन ट्रेनें चलना शुरू हो गई हैं. जापान, ताइवान और ब्रिटेन भी हाइड्रोजन ईंधन तकनीक पर काम कर रहे हैं.

कैसे बनता है हाइड्रोजन ईंधन
हाइड्रोजन सेल (Hydrogen Fuel) यानी बैटरी में ऑक्सीजन के साथ रिएक्शन करके बिजली और पानी उत्पन्न करते हैं. हाइड्रोजन दुनिया में सबसे ज्यादा मात्रा में मिलने वाली गैस है. इसे समुद्री जल से भी अलग कर सकते हैं. इसमें जीरो परसेंट कार्बन उत्सर्जन यानी प्रदूषण रहित है.

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हाइड्रोजन ट्रेन ही क्यों
हाइड्रोजन गैस से बने ईंधन से प्रदूषण नहीं होता, साथ ही ये ज्यादा ताकतवर ऊर्जा प्रदान करती है. कोयला, डीजल या बिजली से ज्यादा बेहतर ऊर्जा का इस्तेमाल हाइड्रोजन चालित ट्रेनों में होता है.हाइड्रोजन ईंधन को ट्रेन के भीतर

जर्मनी में पहली हाइड्रोजन ट्रेन
जर्मन कंपनी अल्सट्राम (Alstrom) ने 2016 में पहली हाइड्रोजन ट्रेन (First Hydrogen Train) चलाई, जिसमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल का इस्तेमाल किया गया था.इससे धुएं की जगह सिर्फ भाप निकलती है और शोर भी नहीं होता. ब्रिटेन की पहली हाइड्रोजन चालित ट्रेन HydroFLEX 2019 में शुरू हुआ.

हाइड्रोजन ट्रेन की रफ्तार और दूरी (Hydrogen Train Speed) 
हाइड्रोजन चालित ट्रेनें (How Fast Can a Hydrogen Train run) 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक दौड़ सकती हैं. ये बिना दोबारा ईंधन भरे 1000 किलोमीटर का सफर कर सकती हैं, जो बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक ट्रेनों के मुकाबले 10 गुना ज्यादा है. इसमें दोबारा ईंधन भरने में 20 मिनट से कम वक्त लगता है.

कितनी सुरक्षित ट्रेनें (Are Hydrogen Trains Safe)
हाइड्रोजन ट्रेनें अन्य combustion engine के मुकाबले सुरक्षित हैं. हवा के साथ मिलकर हाइड्रोजन बेहद ज्वलनशील हो जाती है. लेकिन हाइड्रोजन हवा से हल्की होने के कारण जल्दी से वायुमंडल में चली जाती है. लिहाजा बैटरी या स्टोरेज टैंक फटने का खतरा न के बराबर है.

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