नई दिल्ली: पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI भारत के खिलाफ एक नई और खतरनाक साजिश रच रही है. खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, आईएसआई अब आतंकी संगठनों को पारंपरिक हथियारों की जगह आधुनिक हथियारों और हाई-टेक तकनीक से लैस करने की योजना पर काम कर रही है. इस दिशा में सबसे आगे जैश-ए-मोहम्मद है, जो आने वाले दिनों में क्वाडकॉप्टर और आधुनिक ड्रोन हासिल कर सकता है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अगर जैश को यह तकनीक मिल गई, तो सीमा पार से आतंकी हमलों का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा.
पाकिस्तानी सेना देगी ट्रेनिंग, बढ़ेगा खतरा
सूत्रों के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को पाकिस्तानी सेना की तरफ से आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी जाएगी. जैश पहले ही मशीन गन, रॉकेट लॉन्चर और मोर्टार जैसे हथियार ब्लैक मार्केट से खरीद रहा है, और इसमें उसे ISI का खुला समर्थन मिला हुआ है. अब ड्रोन और क्वाडकॉप्टर आने से हथियारों की तस्करी से लेकर हमलों को अंजाम देने तक, भारत के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं.
ड्रोन तकनीक और डिजिटल फंडिंग से मजबूत हो रहा जैश
जैश-ए-मोहम्मद की आर्थिक ताकत भी अब डिजिटल दुनिया पर आधारित हो गई है. संगठन को हर साल 800-900 मिलियन पाकिस्तानी रुपये की फंडिंग मिलती है, जिसमें बड़ा हिस्सा गल्फ देशों के डोनर्स से आता है. सूत्रों के मुताबिक, यह पैसा अब डिजिटल वॉलेट्स के जरिए आता है और करीब 50% फंडिंग आधुनिक हथियारों की खरीद पर खर्च की जा रही है.
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TTP से रिश्ते और ऑपरेशन सिंदूर का बदला
जैश के तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से भी गहरे रिश्ते हैं. TTP पहले ही ड्रोन हमलों का इस्तेमाल कर चुका है और अब वही तकनीक जैश को भी मिल सकती है . ऑपरेशन सिंदूर में अपने ठिकाने तबाह होने के बाद जैश का सरगना मसूद अजहर बौखलाया हुआ है. पाकिस्तान में बहावलपुर स्थित जैश के हेडक्वार्टर को फिर से बनाने की तैयारी चल रही है. लश्कर-ए-तैयबा, जैश और हिजबुल जैसे आतंकी संगठन अपने ध्वस्त मुख्यालयों और लांच पैड को दोबारा खड़ा करने के लिए चंदा भी मांग रहे हैं.
भारत के लिए बढ़ेगी चिंता
खुफिया सूत्रों का मानना है कि हाई-टेक हथियार और ड्रोन तकनीक आतंकी नेटवर्क को पहले से ज्यादा खतरनाक बना सकते हैं. ड्रोन से हथियारों की तस्करी आसान होगी, सीमा पार से हमले और तेजी से किए जा सकेंगे, और सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौतियां खड़ी होंगी. भारत के खिलाफ इस साजिश का खुलासा भी सबसे पहले एनडीटीवी ने किया था.
