*भरारी सहकारी सोसायटी (रतनपुर ) बिलासपुर में हुआ करोड़ो का भ्र्ष्टाचार?*

*दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद सहकारी उप पंजीयक एवं जाँच अधिकारी ने कोई कार्यवाही नहीं की।*

बिलासपुर:- आखिर जब मिलीभगत में अधिकारी शामिल हो तो कार्यवाही करेगा कौन यें अंदेशा इस लिये मजबूत हो जाता हैं जब किसी की शिकायत आप दस्तावेज के साथ किये हो और उस पर छ माह के बाद भी कार्यवाही तो दूर जाँच एक कदम आगे नहीं बढ़ती हैं जी हा हम बात कर रहें बिलासपुर सहकारी आयुक्त उप पंजीयक एवं सहकारी विस्तार अधिकारी जो जाँच अधिकारी भी है उन्होंने शिकायतकर्ता द्वारा दस्तावेज के साथ भरारी सहकारी समिति (रतनपुर ) बिलासपुर के प्रबंधक एवं अपरेटर द्वारा शासन को करोड़ो की राजस्व क्षति पहुंचाई जिसके दस्तावेज शिकायतकर्ता ने उप पंजीयक तत्कालीन सहकारिता पंजीयक मंजू पांडे को की उन्होंने मामला करोड़ो का हैं कह का Another अधिकारी दुर्गेश साहू को जाँच अधिकारी बना कर कार्यवाही के लिये अधिकृत किया लेकिन जाँच छ माह बाद भी पूरी नहीं हो पाई इससे ऐसा प्रतीत होता हैं कि भरारी प्रबंधक भी साहू हैं कही कोई खिचड़ी न पक गईं हो इसलिए जाँच पूरी नहीं हो पा रही हो और मंजू पांडे उप पंजीयक ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया या प्रबंधक को बचाने का प्रयास किया क्योंकि शिकायतकर्ता ने दस्तावेज के साथ शिकायत की थी उसके बावजूद कार्यवाही नहीं होना शक की सुई दोनों अधिकारियो पर साफ दिखाई देती हैं और इसी की शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से शिकायत की बचाने वाले अधिकारी के साथ भ्र्ष्टाचार करने वाले प्रबंधक,आपरेटर और शामिल शासकीय अधिकारी, कर्मचारियों पर एफ आई आर करके शासन के राजस्व की वसूली की जाये।

शिकायतकर्ता की शिकायत :-

महोदय से निवेदन हैं की ऐसे अधिकारियो पर सख्त से सख्त कार्यवाही करते हुए सोसायटी में हुए करोड़ो रूपये के भ्रष्टाचारियो पर एफ आई आर कर शासन के पैसे की वसूली की जाये।

मेरे द्वारा पंजीयक को निम्न बिन्दुओ पर शिकायत की थी :-

(1) यह कि अधिया में लिये हुये कृषि भूमि में धान बिकी का पूर्ण भुगतान किया गया, जबकि अघिया में ली गयी भूमि का बोनस भुगतान का प्रावधान नहीं है कि जाँच करें।

(2) यह कि सहकारी समिति में किसान के नाम से पंजीयन है, किन्तु भुगतान किसी अंन्य व्यक्ति के बैंक खाते में किया गया कि जाँच करें।

(3) यह कि सहकारी समिति में वास्तविक किसान के नाम के साथ किसी अन्य व्यक्ति का खाते में नाम जोड़कर पूर्ण भुगतान किया गया कि जाँच करें।

(4) यह कि क्या यह कृत्य सहकारी समिति का प्रबंधक, कम्प्यूटर आपरेटर और शाखा प्रबंधक के मिलीभगत से भुगतान किया गया, कि जाँच करें।

(5) यह कि क्या नवीन पंजीकरण में क्या तहसीलदार, पटवारी और तहसील कार्यालय का कम्प्यूटर आपरेटर के द्वारा वास्तविक किसान के नाम के साथ किसी अन्य व्यक्ति का खाते को जोड़ा गया कि जाँच करें।

अतः महोदय से निवेदन है कि उक्त बिन्दुओं पर जाँच कमेटी गठित कर जाँच करायी जाये, जिससे शासन को हुये आर्थिक क्षति की पूर्ति हो सके एवं उक्त दोषी व्यक्तियों पर. एफ.आई.आर. दर्ज कराते हुये वित्तीय क्षति की वसूली हो सके।

*राकेश परिहार की रिपोर्ट*

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